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क्लस्टर आधारित चरणबद्ध तरीके से लागू होगा फसल विविधीकरण प्रोजेक्ट

September 23, 2026 Source: Chhattisgarh-Lens

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क्लस्टर आधारित चरणबद्ध तरीके से लागू होगा फसल विविधीकरण प्रोजेक्ट
रायपुर, 23 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से फसल विविधीकरण एवं व्यापवर्तन पर एक नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में कृषि विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट) के वैज्ञानिकों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि वे छत्तीसगढ़ के किसानों के खेतों में भ्रमण कर किसानों को अच्छी किस्म और अधिक कीमत मिलने वाली फसलों को लेने के लिए प्रेरित करें। जिससे उनकी आमदनी में ईजाफा होगा। बैठक में कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि यह परियोजना ओडिशा राज्य में पहले से सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है, जिसे अब छत्तीसगढ़ में भी लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के अनुरूप फसल प्रणाली विकसित करना, पुनरुत्थान कृषि को बढ़ावा देना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है। परियोजना के बेहतर और अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव 5 वर्षों की अवधि के लिए रखा गया है। इस योजना को राज्य में क्लस्टर आधारित चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। आगामी फसल मौसम से ही प्रयोग शुरू करने के लिए एक विस्तृत बेसलाइन सर्वे तुरंत कराया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि विकास, किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग और अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट) के मध्य एक जेनेरिक समझौता हस्ताक्षरित किया जाएगा। इस जेनेरिक एमओयू तैयार करने में समेति का भी सहयोग लिया जाएगा। इसके तहत मैदानी अमले के क्षमता विकास और तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग लिया जाएगा। कृषकों द्वारा उत्पादित फसल एवं उत्पादों के विक्रय व विपणन के लिए एक सुदृढ़ मार्केट लिंकेज प्रणाली विकसित की जाएगी। इस परियोजना में शासन की विभिन्न कृषि एवं विकास योजनाओं के घटकों एवं क्रियाकलापों का अभिसरण किया जाएगा। बैठक के दौरान इक्रीसेट के वैज्ञानिक डॉ. गजानंद स्वर्गाैनकर द्वारा परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। इस बैठक में अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट) से डॉ. रोहन खोपड़े, डॉ. जी.के. चौधरी एवं डॉ. सी.एल. जैन तथा राज्य कृषि विभाग से संचालक (समेति) श्री बी. के. बिजरोनिया एवं उप संचालक कृषि श्री उमेश सिंह तोमर विशेष रूप से मौजूद रहे।